टीवी वालो को चाहिए TRP और अधिक से अधिक विज्ञापन, कलाकार/अभिनेता को चाहिए कि उनका प्रमोशन हो सके, दर्शको को चाहिए कि कोई बढ़िया भावनात्मक कार्यक्रम देखने को मिले, बस क्या था एक गरीब को पकड़ा और चालू हो गया सबकी मनोकामनाओ को पूरा करने का कार्यक्रम. प्रति 10 सेकंड विज्ञापन के 1 लाख लेने वाले टीवी चैनल गरीब की दिन भर की कमाई का 100 गुना करके देते है. 200 रुपये प्रति दिन की चाय बेचने वालो के स्थान पर एक बड़ा अभिनेता/कलाकार उस गरीब के स्थान पर एक दिन उसका काम करता है और लोगो से धंधे के वक़्त चंदा लेता है और कहता की फलां गरीब के लिए वह अपना कीमती एक दिन दे रहा है और चाय बना रहा है यह कितना पुण्य का काम कर रहा है. साथ ही साथ अपनी आने वाली नई फिल्म को देखने की गुजारिश भी लगे हांथो कर ही डालता है. वाह रे प्रमोशन का तरीका कि गरीब के पेट से भी ये लोग पैसे कमाने में कसर नहीं छोड़ रहे.
आज का मार्केटिंग फंडा अमीरी गरीबी नहीं देखती है वह तो संख्यात्मक गुणा भाग करके उच्चत्तम मुनाफे के लिए काम करता है. किसी कोल्ड ड्रिंक या शैम्पू को ही ले लीजिये जितना मुनाफा उन्हें अमीरों से नहीं है जितना कि गरीबो से. इनके मार्केटिंग फंडे भी गरीब कि ही जेब के अनुसार बन रहे है “कोल्ड ड्रिंक” पीजिये मात्र 10 रुपये में, इसी तरह हर कंपनी का शैम्पू आजकल पाउच में उपलब्ध है ताकि गरीब से गरीब भी उस अंतर्राष्ट्रीय उत्पाद को खरीद सके और कंपनी कि पहुच गरीब गरीब तक हो जाये. कुछ समय पहले “मैगी” का वह विज्ञापन जो 5 रुपये वाला मैगी का विज्ञापन करता हुआ एक गरीब बच्चा और उसकी माँ दिखाए जाते है बहुत ही भावनात्मक विज्ञापन था लेकिन ये भावनाए तो हमारे मन में जागी पैसे और नया उपभोक्ता तो कंपनी को मिल रहा है वो भी अप्रत्यक्ष मुनाफे के साथ.
दुनियाँ भी अजीब है और उन सब में हमारा भारत देश तो कुछ ज्यादा ही अजीब है जहाँ जरुरतमंदो कि जरुरत पूरी नहीं होती और गैरजरुरतमंद उल्टी कर-कर के खा रहे है.
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Newshence