भारत में संस्थानों की संरचना जो कि एक सफलतम इकाई के रूप में स्थापित हो ऐसी ही कार्यप्रणाली की आज में बात करने जा रहा हूँ. बात की शुरुआत मै इस तर्क के साथ करने जा रहा हूँ कि हमारे भारतीय व्यवसायिक संस्थानों जो कि आम और सामान्य विचारो की उपज की देन से खोली जाती है उनके बाज़ार परिद्रश्य में सफल होने की संभावनाएं समय के साथ क्षीण पड़ती जाती है क्योकि उनके साथ गणनाओं का आभाव होता है और त्वरित परिस्थितियों के अनुसार स्थापित की जाती है जो कुछ समय के बाद क्षीण पड़ने लगती है और अंततः समाप्ति की ओर चल देती है. इन्ही सभी बातों को ध्यान मे रखते हुए कुछ जानकारियाँ साझा कर रहा हूँ कि कैसे आप अपनी संस्था को सुदृढ़ और सफल बनावे. व्यवसायक संस्था की उत्पत्ति के पीछे जो प्रमुख करक काम करता है वो है “विचार”. विचार जिसे हम IDEA भी कहते है उसका होना जरूरी है नाकि किसी और के काम की कॉपी करना कि फलां आदमी तो उस काम से अच्छा कमा रहा है क्यों न मै भी वही काम करके वैसे ही मुनाफा कमाऊ तो यहाँ मेरा कहना है कि विचार पर काम व्यक्ति अपनी परिस्थियों के अनुसार करता है तो जरूरी नहीं कि उसका विचार के अनुसार किया गया काम ...
मुद्दा ब्लॉग समाज में व्याप्त समस्याओं को उठाना है.