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उपेक्षित बुंदेलखंड

बुंदेलखंड के कई राष्ट्रीय स्तर के जन प्रतिनिधि इस देश को दिए है लेकिन आज तक किसी ने भी इसके डेवलोपमेन्ट के बारे में नही सोचा। बस अपनी जेबे भरना यहां के जन प्रतिनिधियों की पहली प्राथमिकता है।
बात छतरपुर की करे तो 

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गरीब कि आँखों में अमीरों का सपना

ब ड़ा सा चमचमाता मंच, चारो ओर कैमरों की नज़रे, चन्द भद्र दर्शक, दुनियां के बड़े बड़े अभिनेता, दुनियां भर के टीवी दर्शक और उन सबके बीच बैठा एक गरीब जिसने अपने सपने में भी ऐसी जगह नहीं देखी. ये मंज़र है कलर टीवी पर प्रकाशित नए रियलिटी शो “सपने” का. आज के भारतीय समाज में कुछ भी व्यवसाय किया जा सकता है फूहड़ता और हकीकतो से दूर टीवी सीरियल वालो को अब गरीबी से भी पैसे कमाने का रामबाण तरीका मिल गया है. चंद पैसो की मदद के एवज में करोडो का कारोबार करने की जुगत में आज टीवी चैनल वाले दर्जनों प्रोग्राम बना रहे है. जिसमे गरीब की गरीबी बेचीं जा रही है. टीवी वालो को चाहिए TRP और अधिक से अधिक विज्ञापन, कलाकार/अभिनेता को चाहिए कि उनका प्रमोशन हो सके, दर्शको को चाहिए कि कोई बढ़िया भावनात्मक कार्यक्रम देखने को मिले, बस क्या था एक गरीब को पकड़ा और चालू हो गया सबकी मनोकामनाओ को पूरा करने का कार्यक्रम. प्रति 10 सेकंड विज्ञापन के 1 लाख लेने वाले टीवी चैनल गरीब की दिन भर की कमाई का 100 गुना करके देते है. 200 रुपये प्रति दिन की चाय बेचने वालो के स्थान पर एक बड़ा अभिनेता/कलाकार उस गरीब के स्थान पर एक दिन उसका काम करत...

व्यवसाय स्थापना, संस्थान की संरचना एवं कार्यप्रणाली

भारत में संस्थानों की संरचना जो कि एक सफलतम इकाई के रूप में स्थापित हो ऐसी ही कार्यप्रणाली की आज में बात करने जा रहा हूँ. बात की शुरुआत मै इस तर्क के साथ करने जा रहा हूँ कि हमारे भारतीय व्यवसायिक संस्थानों जो कि आम और सामान्य विचारो की उपज की देन से खोली जाती है उनके बाज़ार परिद्रश्य में सफल होने की संभावनाएं समय के साथ क्षीण पड़ती जाती है क्योकि उनके साथ गणनाओं का आभाव होता है और त्वरित परिस्थितियों के अनुसार स्थापित की जाती है जो कुछ समय के बाद क्षीण पड़ने लगती है और अंततः समाप्ति की ओर चल देती है. इन्ही सभी बातों को ध्यान मे रखते हुए कुछ जानकारियाँ साझा कर रहा हूँ कि कैसे आप अपनी संस्था को सुदृढ़ और सफल बनावे. व्यवसायक संस्था की उत्पत्ति के पीछे जो प्रमुख करक काम करता है वो है “विचार”. विचार जिसे हम IDEA भी कहते है उसका होना जरूरी है नाकि किसी और के काम की कॉपी करना कि फलां आदमी तो उस काम से अच्छा कमा रहा है क्यों न मै भी वही काम करके वैसे ही मुनाफा कमाऊ तो यहाँ मेरा कहना है कि विचार पर काम व्यक्ति अपनी परिस्थियों के अनुसार करता है तो जरूरी नहीं कि उसका विचार के अनुसार किया गया काम ...

अच्छे दिन आने वाले है?

विशाल वहुमत के साथ NDA और भाजपा ने अपने विरोधियों को नेस्ताबूत कर दिया. और जनता के बीच एक नया उन्माद पैदा हो गया है एक आशा सभी के मन में जाग गई कि अब शायद “अच्छे दिन आने वाले है”, लेकिन ये अच्छे दिन किस रूप में आयेंगे? क्या भारत एकदम से सुपरपॉवर बन जायेगा? महंगाई खत्म हो जाएगी? बेरोजगारों को रोजगार मिल जायेगा? किसानो का भला हो  जायेगा? इन सवालो को हम रोज न्यूज़ चैनलों पर बहस के रूप में देख रहे है. कई न्यूज़ चैनलों ने तो गणनाएं करके भविष्यबाणी भी कर दी है कि सरकार क्या-क्या और कैसे काम करेगी. लेकिन इन सब के बीच एक बात तो स्पष्ठ है कि कुछ तो बदलाव दिख रहा है. बात करे भारतीय बाज़ार कि तो संवेदी सूचकांक में चुनाव परिणाम के बाद से एकदम उछाल देखने को मिल रहा है. निवेशक भी लौट कर आ रहे है. कई बड़ी कंपनियों ने तो भारी निवेश कि मंशा भी जता दी है. सोने में भी गिरावट देखने को मिल रही है. बाज़ार में सब्जियां भी स्थिर और कम दाम पर मिल रही है. रियल एस्टेट मार्किट भी गिरावट कि जगह स्थिर सा लग रहा है लोग दोबारा से निवेश में रूचि ले रहे है. इन कुछ परिस्थतियों को देखकर तो लगता है कि कुछ भरोसा बाज़ार में...